ट्रैडिंग और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के फायदे, नुकसान | Trading vs long term investing pro and cons in hindi

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दोस्तों आज के समय में लोग शेयर मार्केट व् क्रिप्टो मार्किट के अंदर अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं क्योंकि पहले जहां लोग एफड़ी में अपना पैसा लगाते थे उस ट्रेंड को अब चेंज कर दिया है। यह है क्योंकि शेयर मार्केट से आप कितना रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं इतना आप एफडी से कभी भी प्राप्त नहीं कर सकते है।

आप जितना रिटर्न शेयर मार्केट से निकाल सकते हैं उतना ही इसके अंदर जोखिम भी होता है। लेकिन किसी ने सही कहा है जहां रिस्क है वहां पैसा। अगर कम समय के अंदर पैसा कमाना है तो आपको शेयर मार्केट (Share Market) की दुनिया में घुसना ही होगा। शेयर मार्केट दो तरीके से पैसा इन्वेस्ट किया जाता है सबसे पहले ट्रेडिंग के माध्यम से और दूसरा लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट।

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ट्रेडिंग में अपना पैसा इन्वेस्ट करके वहां से प्रॉफिट निकलते हैं वही कुछ लोग लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को सबसे अच्छा विकल्प मानते हैं। अब ऐसे में परेशानी है उठना है कि आखिर ट्रेडिंग बेस्ट है या फिर लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट? तो अगर आप इसका जवाब चाहते हैं तो इस पोस्ट को एंड तक पूरा देखें  करें।इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि ट्रेडिंग (Trading) या फिर इन्वेस्टिंग (Investing) में से कौन सा बेस्ट है और उनके अपने-अपने क्या फायदे और नुकसान है उसके बारे में भी जानकारी देने वाले है।

ट्रैडिंग क्या होती है (What is Trading )

ट्रेडिंग ,यह एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में ज्यादातर स्टॉक मार्केट में आने वाले नए लोगों को पता ही नहीं होता है आज भी कई स्मॉल रिटेलर्स स्टॉक मार्केट में है जो ट्रैडिंग और इन्वेस्टमेंट को एक समान ही समझते है लेकिन इन दोनों ही चीजों में जमीन आसमान का अंतर है।

अगर हम ट्रेडिंग को आसान शब्दों में समझे तो इसका मतलब होता है “व्यापार”।जिसके तहत आपको किसी भी वस्तु को खरीद कर उसे कम समय के अंदर बेचना होता है। यहां वस्तुओं से हमारा मतलब है कि किसी भी कंपनी के शेयर की खरीद और बिक्री करके प्रॉफिट कमाया जाता है।

ट्रेडिंग के अंदर हम स्टॉक एक्सचेंज से कम प्राइज के अंदर शेयर को खरीदने हैं और जब उसका प्राइस बढ़ता है तो हम उसे बेच देते हैं इस बीच हम जितनी क्वांटिटी खरीदने हैं तो उसे हिसाब से हमें प्रॉफिट या फिरलॉस भी देखने को मिल सकता है।

लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट क्या है -(What is Long Term Investment in Hindi)

दोस्तों दुनिया के जितने भी बड़े-बड़े शेयर मार्केट के खिलाड़ी हैं जैसे वारेन बफेट,राकेश झुनझुनवाला यह सभी लोग लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में ही अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं। अगर आपको लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के बारे में नहीं पता है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके अंदर आपको किसी भी कंपनी के शेयर का चुनाव करना पड़ता है और उसे लंबे समय के लिए होल्ड करके रखना पड़ता है।

समय के साथ-साथ जैसे-जैसे आपकी कंपनी की ग्रोथ होती रहेगी वैसे ही आपके स्टॉक का प्राइज भी बढ़ता रहेगा, इसी के साथ बहुत से इसे शेयर होते है जो डिविडेंट भी देते है। केवल आपको एक बार अच्छे से किसी भी कंपनी के स्टॉक के बारे में पता लगाना है और उसमें अपना पैसा डाल देना है, इसके बाद आप बाकी के काम अपने संभाल सकते हैं इसमें आपका पैसा लंबी अवधि के लिए पड़ा रहेगा। शुरुआत में लगबघ लोग सस्ते शेयर में पैसे लगा देते है जिनका बाद में भरी नुकसान उठाना पड़ सकता है , इसलिए पेनी स्टॉक्स से भी आपको दुरी बना के रखना चाहिए, हमने पिछले आर्टिकल में पेनी स्टॉक्स के नुकसान के बारे में बताया है आप उन्हें भी पढ़ सकते है।

Trading Pros and Cons

ट्रेडिंग के फायदे ट्रेडिंग के नुकसान 
1.अगर आप लोग कम समय के अंदर ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं तो उसके लिए ट्रेडिंग सबसे बेस्ट विकल्प है।ट्रेडिंग में सबसे ज्यादा रिस्क होता है।
2.ट्रेडिंग में अगर आपके पास कम पैसा है तब भी आप बड़े अमाउंट के साथ ट्रेड ले सकते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि आपको लेवरेज मिल जाता है।ट्रेडिंग में आपको कम समय के अंदर ही मार्केट से बाहर निकालना पड़ता है और यहां पर वोलैटिलिटी काफी तेजी से होती है जिसके चलते पैसा लॉस होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
3.आप लोग लॉन्ग ट्रेडिंग या फिर शॉर्ट ट्रेडिंग दोनों ही तरीके से पैसे कमा सकते हैं।जितना तेजी से आपट्रेडिंग में पैसा कमाते हैं उससे कहीं ज्यादा तेजी से आप पैसे गवा भी सकते हैं।
4.ट्रेडिंग आप दुनिया के किसी भी कोने से कर सकते हैं बस आपके पास एक इंटरनेट कनेक्शन और मोबाइल फोन होना आवश्यक है।ट्रेडिंग के अंदर इंसान को कई चीजों की आवश्यकता पड़ती है जैसे साइकोलॉजी, नॉलेज, कैंडलेस्टिक पेटर्न्स  और इंडिकेटर्स।
5.ट्रेडिंग में 18 साल के बाद बुड्ढे होने तक ट्रेड कर सकते हैं इस पर आपको किसी भी तरह की रोकतोक देखने को नहीं मिलेगी।ट्रेडिंग में कभी कबार ओवर ट्रेडिंग करने के चक्कर में हमारे प्रॉफिट से ज्यादा ब्रोकरेज लग जाता है।
5.ट्रेडिंग से आप बहुत ही कम समय के अंदर पैसा बनाकर बाहर निकाल सकते हैं उसके बाद आप अपनी फैमिली या फिर खुद के ऊपर टाइम स्पेंड कर सकते हैं।ट्रेडिंग के अंदर आपको डिविडेंड की सुविधा नहीं मिलती है
6.ट्रेडिंग में अगर आप लोग किसी भी एक स्ट्रेटजी पर मास्टरी हासिल कर लेते हैं तो आप उसका इस्तेमाल करके लंबे समय तक पैसा बनाते हैं।ट्रेडिंग में म्युचुअल फंड अलाउड नहीं होते हैं।
7.ट्रेडिंग करने से आपके दिमाग का आईक्यू लेवल भी  काफी हद तक विकसित हो जाता है।ट्रेडिंग में रिस्क अधिक होने की वजह से आपका मेंटल स्ट्रेस भी ज्यादा रहता है।
8.ट्रेडिंग में आप फास्ट मूवमेंट का लाभ उठाकर कम समय के अंदर अच्छा पैसा बना सकते हैं।ट्रेडिंग के अंदर हर 100 लोगों में से पांच लोग पैसा कमाते हैं और 95 लोग अपना पैसा गवाते हैं।

Long Term Investment Pros and Cons

लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के फायदे लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के नुकसान 
1.ट्रेडिंग की बजाय लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें आप लंबे समय तक पोजीशन को बनाए रख सकते हैं जिससे लॉस होने का खतरा काफी हद तक काम हो जाता है।लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसे पैसा कमाने के लिए आपको लंबे समय का इंतजार करना होता है कभी कबार लंबे समय के इंतजार के बाद भी पैसा नहीं बन पाता है।
2.लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के अंदरआपको किसी भी तरह का ब्रोकरेज चार्ज नहीं देना होता है क्योंकि आप एक लंबी पोजीशन बनाते हैं।जब भी आप लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट करते हैं तो वहां पर टेक्निकल एनालिसिस कोई काम नहीं आता है आप केवल कंपनी के पोर्टफोलियो को देख कर ही किसी कंपनी में पैसा इन्वेस्ट करते हैं जो कभी कबार रिस्की भी साबित हो सकता हैं।
3.लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट आपके दूसरे काम में कोई भी बाधा नहीं डालता है।मार्केट करेक्शन के समय लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में पैसा डूबने का खतरा रहता है।
4.अब जिसकी कंपनी में अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं अगर वह आने वाले समय में अच्छा परफॉर्म करती है तो आपको कंपनी की तरफ से डिविडेंड भी दिया जाता है इसके अलावा आप म्युचुअल फंड में भी अपना पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं।लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में पेशेंस की आवश्यकता होती है जो कि आज के समय में लोगों के अंदर बहुत ही कम देखने को मिलता है।

Trading vs long term investing में से कौन अच्छा है?

ट्रेडिंग और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में से कौन सा बेस्ट है तो इसका जवाब हर एक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है कुछ लोग ट्रेडिंग में ज्यादा इंटरेस्ट रखते हैं तो वो लोग यहाँ से मोटा पैसा छाप रहे हैं। वही बात करें लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की तो वारेन बफेट, राकेश झुनझुनवाला जैसे लोग आज जिस मुकाम पर है वह केवल लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट ही है। ये लोग हमेशा ही लोगों को सलाह देते हैं कि कभी भी क्विक मनी के पीछे मत भागो आपको हमेशा एक लॉन्ग टर्म प्लान के तहत काम करना है।

अगर वैसे रिस्क के फैक्टर को ध्यान में रखकर देखा जाए तो ट्रेडिंग में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट से ज्यादा रिस्क होता है। लेकिन हमने आपको पोस्ट की शुरुआत में ही बताया था जहां पर रिस्क है वहां पर पैसा भी है। शेयर मार्केट एक ऐसी जगह है जहां पर आप अगर क्विक मनी के पीछे भागेंगे तो यह आपको कंगाल करने में समय नहीं लगाएगा। चाहे आप ट्रेंडिंग करो या फिर लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट कभी भी बिना नॉलेज के साथ इसमें ना घुसे, अगर आपको दोनों में से कुछ भी समझ नहीं आ रहा के कहा पर इन्वेस्ट करना चाहिए तो आप म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट कर सकते है , वह पर रिस्क कम होता है और आपको रिसर्च करने में और मार्किट पर ध्यान करने के लिए ज्यादा समय नहीं देना होगा

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Conclusion

उम्मीद करते हैं दोस्तों आपको Trading vs long term इन्वेस्टीग के फायदे और नुकसान से जुड़ी हुई जानकारी पसंद आई होंगी। एक बात का ध्यान रखें जल्दी आप शेयर मार्केट में उतरे तो कभी भी ओवर कॉन्फिडेंस के साथ अपना पैसा इन्वेस्ट ना करें अन्यथा शेयर मार्केट आपको लाइफ के उसे मोड पर लाकर खड़ा कर देगा जहां पर आप ना तो चैन से खा सकेंगे और ना ही चैन से सो सकेंगे।

FAQ

इन्वेस्टर और ट्रेडर में से कौन ज्यादा पैसा कमाता है?

दोस्तों जहां पर बात जल्दी पैसे कमाने की और ज्यादा पैसे कमाने की आती है तो सबसे पहला नाम ट्रेडिंग का ही आता है। क्योंकि ट्रेडिंग के अंदर काफी हाई रिस्क होता है और जिसके चलते आपको काफी हाई प्रॉफिट भी देखने को मिलता है वही टेस्टिंग के अंदर आपको कम रिस्क देखने को मिलता है वही आपको एक लंबे समय के बाद कुछ प्रॉफिट देखने को मिल सकता है।

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